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उत्तराखंड- टिहरी रियासत (भाग – 1) [Uttarakhand – Tehri Princely State (Part -1)]

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उत्तराखंड- टिहरी रियासत (भाग – 1)


Uttarakhand – Tehri Princely State (Part -1)


अंग्रेजों के आने के बाद गढ़वाल को टिहरी रियासत से जाना गया। टिहरी रियासत के राजा –

  1. सुदर्शन शाह (1815 – 1849)
  2. भवानी शाह (1859 – 1871)
  3. प्रताप सिंह (1871 – 1886)
  4. कीर्ति शाह (1886 – 1913)
  5. नरेन्द्र शाह (1913 – 1946)
  6. मानवेन्द्र शाह (1946 – 1949)

 

1. सुदर्शन शाह (1815 – 1849)  –

  • प्रधुम्न शाह के दो पुत्र थे सुदर्शन शाह और प्रीतम शाह (द्वीतीय)।
  • प्रतिम शाह को गोरखाओं द्वारा कैद कर लिया गया था तथा सुदर्शन शाह भागकर हरिद्वार में शरण लेली थी।
  • उसके बाद सुदर्शनशाह निरंतर स्वतंत्र होने का प्रयास करता है था अंततः सुदर्शन शाह ने अंग्रेजों की सहायता से टिहरी रियासत की स्थापना की थी।
  • सुदर्शन शाह ने अंग्रेजों को कर देना स्वीकार कर लिया था परन्तु सुदर्शन शाह अंग्रेजों को कर देने में असमर्थ हो रहा था।
  • इसी कारण अंग्रेजों ने अलकनंदा नदी के पूर्वी भाग में अपना अधिकार कर लिया था।
  • अलकनंदा के पश्चिमी भाग में सुदर्शन शाह द्वारा टिहरी राज्य की स्थापना की गयी थी।
  • सुदर्शन शाह पंवार वंश का 55वाँ राजा था।
  • 28 दिसम्बर 1815 को टिहरी रियासत की स्थापना हुई और सुदर्शन शाह राजा बना था।
  • सुदर्शन शाह के द्वारा अपनी राजधानी श्रीनगर से टिहरी स्थानांतरित की गयी थी।
  • सुदर्शन शाह का समकालीन कुमाऊँ में कमिश्नरी ट्रेल , हैनरी रेमेज था।
  • 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में सुदर्शन शाह में अंग्रेजो का साथ दिया था।
  • सुदर्शन शाह ने एक राज भवन का निर्माण कराया था, जिसे पुराना दरबार कहा गया।
  • सुदर्शन शाह के शासन काल के दौरान 1820 में ब्रिटिश  पर्यटन मुर क्राफ्ट आया था।
  • 1817 में प्रीतम शाह -II को सुदर्शन शाह द्वारा स्वतंत्र करा लिया गया था।
  • 1826 में सुदर्शन  शाह ने कांकड़ के राजा संसार चंद की दो राजकुमारियों गुण देवी और खनेती के साथ विवाह हुआ था।
  • बाणाहाट अभिलेख में सुदर्शन शाह को “कलाविदो का शिरोमणि” कहा गया है।
  • सुदर्शन शाह को दाता भी कहा जाता था।
  • सुदर्शन शाह के दरबार में मोलाराम ,मणकू,चैतू आदि चित्रकार थे।
  • सुदर्शन शाह एक कला प्रेमी शासक था।
  • सुदर्शन शाह ने 1828 में सभासार नामक ग्रन्थ की रचना की थी, यह पुस्तक 7 खंडों में है।
  • सुदर्शन शाह ने इस पुस्तक में स्वंय को कवि सूरत कहा है।
  • बाणाहाट अभिलेख की रचना हरिदत्त शर्मा द्वारा की गयी थी।
  • कुमाऊँ के गुमानी पन्त को भी सुदर्शन शाह ने संरक्षण दिया  था।
  •  टिहरी की प्रजा राजा को  बोलांदा बद्रीश कहती थी।
  • 1858 में सुदर्शन शाह द्वारा भागीरथी पर प्रथम बार लकड़ी का पुल बनाया था।
  • 1851 में टिहरी रियासत का प्रथम आंदोलन हुआ था जिसे अठुर विद्रोह कहा जाता है।
  • अठुर विद्रोह का नेतृत्व बद्री सिंह अस्वाल द्वारा किया गया था।
  • राजस्व एकत्र करने हेतु सैथ्याणो द्वारा कामदार नामक अधिकारी नियुक्त किये गए थे।
  • कर दो प्रकार से लिया जाता था, नगद व् अनाज के रूप में लिया जाता था।
  • नगद कर देने वालो को सैथ्याणा तथा आनाज देने वालो को  बिसाह कहा जाता था।
  • नेपाल के मनोरथ सुदर्शन शाह के दरबार में रहते थे, सत्यानंद , दुर्गानंद तथा बासवानंद जैसे प्रसिद्ध ज्योतिषी सुदर्शन शाह के दबार में ही रहते थे।
  • कुमुदानंद ने सुदर्शनो काव्य की रचना की थी।
  • सुदर्शन शाह ने अपने प्राणों को खतरे में डालकर अंग्रेज अधिकारी फ्राइडन की बाघ से रक्षा की थी।
  • मोलाराम के द्वारा सुदर्शन कविता की रचना गयी। इस पुस्तक में मोलाराम ने सुदर्शन शाह की निंदा की है क्यूंकि उन्हें राजा से उचित सम्मान प्राप्त नहीं था।इस पुस्तक में मोलाराम ने सुदर्शन शाह को सूम, कृपण, खसिया नृप आदि कहा है।
  • सुदर्शन शाह की मृत्यु 1859 में हुई थी।
  • टिहरी रियासत का प्रथम भूमि बंदोवस्त 1823 में सुदर्शन शाह द्वारा किया गया था।
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