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उत्तराखंड-अंग्रेज प्रसाशन (Uttarakhand – British Administration)

उत्तराखंड-अंग्रेज प्रसाशन भाग-1


Uttarakhand – British Administration Part -1


1815 में गोरखाओं को पराजित करने के पश्चात् उत्तराखंड में ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से अंग्रेजी राज्य प्रारंभ हो गया था। अंग्रेजो के द्वारा कुमाऊँ जनोअद का गठन किया गया था। कुमाऊँ जनपद को फारुकाबाद कमिश्नरी के अंतर्गत रखा गया था।अंग्रेजो द्वारा गढ़वाल तहसील भी बनाई गयी थी।अंग्रेजो ने उत्तराखंड को 2 भागों में विभक्त किया गया था।

  1. टिहरी रियासत
  2. गैर विनियमित क्षेत्र (Non Regulated Area)

1817 में देहरादून को सहारनपुर मंडल में मिला दिया गया था।


कुमाऊँ कमिश्नर (Kumaon Commissioner)


एडवर्ड गार्डन (1815 – 1816) –

  • एडवर्ड गार्डन को  ब्रिटिश कुमाऊँ का प्रथम कमिश्नर नियुक्त किया गया था।
  • इसका कार्यकाल मात्र 6 माह तक रहा था।
  • इसके बाद गार्डन ने काठमांडू कोर्ट में कंपनी के राजनितिक एजेंट के रूप में कार्यभार संभाला।
  • 1815 में गार्डन ने लडको को बेचने की प्रथा को बंद करवाया था।
  • गार्डन के द्वारा कुमाऊँ में प्रथम भूमि बंदोबस्त कराया था।
  • गार्डन का सहायक G.W. ट्रेल था।

जी. डब्लू. ट्रेल (1816- 1835) – 

  • G.W. ट्रेल को कुमाऊँ का प्रथम वास्तविक कमिश्नर कहा जाता है।
  • ट्रेल स्वंय के ही बनाये नियमों के अनुसार चलता था इसलिए ट्रैल के शासन काल कोप ना वकील , ना अपील, ना दलील कहा जाता था।
  • ट्रेल द्वारा कुमाऊँ को 26 परगनों में विभिक्त किया गया था।
  • 1823 में ट्रेल ने भूमि बंदोबस्त करवाया था जिसे अस्सी साला पंचशाला बंदोबस्त कहा जाता था।
  • ट्रेल ने 1819 में 9 पटवारियों के नए पद बनाये थे।
  • पटवारी को रेवन्यू पुलिस की संज्ञा दी गयी थी क्यूंकि उस समय पटवारी पुलिस का कार्य भी करते थे।
  • ट्रेल के कार्यकाल में अपराध को कम करने हेतु अल्मोड़ा में 1816 व पौड़ी में 1821 में जेलों की स्थापना की गयी थी।
  • ट्रेल ने अल्मोड़ा से श्रीनगर के मध्य डाक व्यवस्था की शुरुवात की थी।
  • ट्रेल ने 1820 में कोर्ट फीस स्टाम्प की शुरुवात की थी।
  • ट्रेल ने ईसाई होकर हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार किया था।
  • 1822 में ट्रेल ने कुमाऊँ में आबकारी विभाग की स्थापना की थी।
  • ग्लिन अंग्रेज अधिकारी की सहायता से 1822 में ट्रेल ने उत्तराखंड का विस्तृत सर्वे कराया था।
  • ग्लिन अंग्रेज अधिकारी ने ही ट्रेल को कुली बेगार प्रथा के स्थान पर खच्चर सेना का प्रस्ताव रखा था जिसे ट्रेल ने स्वीकार कर लिया था और फिर खच्चर सेना गठन किया था।
  • 1824 में ट्रेल ने सरकारी खजाने के नियन्त्रण के लिए डबल लॉक प्रणाली लागू की थी।
  • डबल लॉक प्रणाली के तहत खजाने की एक कुंजी (चाबी) कलेक्टर के पास तथा दूसरी चाबी ट्रेजरर के पास रहती थी।
  • 1817 में ट्रेल ने विनियमन (Regulation) – 10 पारित किया था।
  • 1826 में देहरादून व चंडी कुमाऊँ जनपद में शामिल कर दिए गए थे।
  • 1 मई 1829 को देहरादून को अलग कर दिया गया था तथा सहारनपुर का हिस्सा बना दिया गया था।
  • 1830 में ट्रेल ने कुमाऊँ में नदियों पर लोहे के पुल बनवाए थे।
  • 1831 में कुमाऊँ इलाहबाद (वर्तमान नाम – प्रयागराज) की निजामत कोर्ट के आधीन आ गया था।
  • 1833 में ट्रेल द्वारा अल्मोड़ा में प्रथम देशी चिकित्सक नियुक किया गया था।
  • 1834 ,में ट्रेल ने हल्द्वानी की स्थापना की थी।
  • एटकिन्सन ने ट्रेल को न्याय कमिश्नर कहा है।
  • ट्रेल के शासन काल को ट्रेल गर्दी भी कहा जाता है।
  • 1 दिसम्बर 1835 को ट्रेल सेवानिवृत्त हो गया था।
  • ट्रेल के बाद मोल्सेस्मिथ ने कार्यवाहक कमिश्नर का कार्यभार संभाला था।

जॉर्ज गोबन (1836-38)- 

  • जॉर्ज गोबन अनुभवहीन कमिश्नर था। इसी कारन से इसे बहुत जल्द इस पद से हटा दिया गया था।
  • 1836 में जॉर्ज गोबन ने दास प्रथा का अंत कर दिया था।
  • 1837 में जॉर्ज गोबन सदर अमीन का पद नियुक्त किया था।
  • जॉर्ज गोबन ने गोरखाओं द्वारा बनी दिव्य प्रथा को समाप्त कर दिया गया था।
  • 1837 में जॉर्ज गोबन ने अल्मोड़ा में थाने की स्थापना की गयी थी।
  • 1837 में मिस्टर वर्ड को कुमाऊँ प्रसासन की जाँच हेतु भेजा गया था।

जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन (1839-1847) –

  • जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन के शासनकाल को शून्यकाल भी कहा जाता है।
  • 1839 में स्वतंत्र कुमाऊँ कमिश्नरी का गठन किया गया था।इसके अंदर 2 जनपद कुमाऊँ व गढ़वाल थे।
  • जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन के समय पी.बैरन ने 1841 में नैनीताल प्रथम बार देखा गया था उसके बाद जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन द्वारा नैनीताल का नगरीकरण किया गया था।
  • 1842 में जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन ने तराई जिलो का गठन किया तथा उसे कुमाऊँ कमिश्नरी में शामिल किया गया था।
  • 1843 में जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन ने नैनीताल में थाना बनाया था।
  • 1845 में जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन ने खैरना नैनीताल मार्ग बनाया था।
  • 1848 में जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन ने बागेश्वर में गोमती नदी में पुल बनाया था।
  • 1848 में कुमाऊँ कमिश्नरी से तारे जिलो को अलग कर दिया गया था।
  • 1848 में जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन ने अल्मोड़ा में डिस्प्रेंसी कमेटी की स्थापना की थी।
  • जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन ने अल्मोड़ा में औषधालय की स्थापना की थी।
  • गुमानी पन्त ने जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन की प्रशंसा की है।
  • जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन एक मात्र एसा कमिश्नर था जिसकी पद पर रहते हुए मृत्यु हुई थी।
  • जॉर्ज थॉमस लुसिंग्टन की समाधी नैनीताल में है।

जॉर्ज बेटन (1848-1856) – 

  • जॉर्ज बेटन के शासनकाल को स्वर्ण काल कहा जाता है।
  • जॉर्ज बेटन के कमिश्नर बनने से पूर्व यह कमिश्नर गोबन का सहायक रहा था।
  • जॉर्ज बेटन ने प्रशिक्षित पटवारी की नियुक्ति की थी।
  • जॉर्ज बेटन के समय 1853 में इसके सहायक स्ट्रेची के द्वारा गढ़वाल के श्रीनगर में प्रथम सस्पेंसन लोहे का पुल बनवाया गया था।
  • जॉर्ज बेटन ने 8 वाँ भूमि बंदोबस्त कराया था जो 20 वर्ष के लिए था।जो कुमाऊँ व गढ़वाल में 1844 में लागू हुआ था।
  • 1855 में जार्ज बटन ने कुमाऊँ कमिश्नरी का मुख्यालय नैनीताल में बनाया था।
  • जॉर्ज बेटन ने 1855 में रकम नियम लागू किया था।
  • जॉर्ज बेटन के समय 1853 में इसके सहायक स्ट्रेची के द्वारा गढ़वाल के श्रीनगर में प्रथम सस्पेंसन लोहे का पुल बनवाया गया था।
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