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सिक्खों के प्रथम राजनैतिक नेता-बंदा बहादुर

सिक्खों के प्रथम राजनैतिक नेता-बंदा बहादुर


The first political leader of the Sikhs – Banda Bahadur


बंदा बहादुर (1708 से 1716 ईस्वी )

जन्म– 1670 ईस्वी

जन्म स्थान- पूंछ जिले का राजोली गांव ( जम्मू – कश्मीर )

पिता का नाम- रामदेव भारद्वाज ,इनके पिता एक राजपूत थे।

बचपन का नाम – लक्ष्मण देव

कुछ समय पश्चात इनका नाम माधव दास रखा गया तथा बैराग लेने के पश्चात यह ” माधव दास बैरागी “कहलाए।
नांदेर नामक स्थान पर ये सिक्खों के दसवें गुरु गुरुगोविंद सिंह से मिले, उनसे मिलने पर बंदा बहादुर गुरु गोविंद से अत्यधिक प्रभावित हुए तथा उनके शिष्य बन गए।

गुरु गोविंद के शिष्य बनने के पश्चात यह स्वयं को गुरु का बंदा कहकर संबोधित करने लगे, यहीं से इनका नाम बंदा बहादुर पड़ा।

गुरु गोविंद सिंह ने इन्हें एक नयी पहचान देते हुए इनका नाम गुरबख्श सिंह रखा।

गुरु गोविंद सिंह ने अपने अंतिम समय में बंदा बहादुर को सिक्खों का राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया तथा शिष्यों की एक बड़ी सेना के साथ में पंजाब भेजा था।

बंदा बहादुर सिक्खों का प्रथम राजनीतिक नेता बना तथा इन्होंने प्रथम सिक्ख राज्य की नींव डाली।

बंदा का उद्देश्य पंजाब में एक मजबूत सिक्ख साम्राज्य की स्थापना करना था इसी के साथ इन्होंने सिक्खों पर अत्याचार करने वाले लोगों से बदला लेना भी शुरू किया।

बन्दा ने लौहगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।

बंदा का सबसे पहला अभियान सोनीपत में था।

सिक्कों के अत्याचार का बदला लेने के क्रम में इन्होंने सरहिंद के सूबेदार वजीर खां को पराजित कर उसकी हत्या कर दी, इसी के साथ इन्होंने सरहिंद के 28 परगनों को जीता तथा वहां सिक्ख अधिकारियों की नियुक्ति की।

बंदा ने सिक्ख शक्ति का वर्चस्व फैलाते हुए गुरु नानक तथा गुरु गोविंद सिंह के नाम के सिक्के चलाए और सिक्ख राज्य की मुहर भी बनवाई।

बंदा ने शाहदरा में हजारों मुगल सैनिकों का कत्ल किया, इस कारण शाहदरा कत्लगड़ी के नाम से भी विख्यात हुआ है ।
बंदा की दिन प्रतिदिन बढ़ती शक्ति को देखकर मुगल बादशाह फर्रूखसियर ने बंदा के विरुद्ध मुगल सेना भेजी तथा 1776 में गुरदासपुर के पास युद्ध शुरू हुआ 8 महीने के घेरे के बाद बंदा ने आत्मसमर्पण किया ।

बंदा को गुरदासपुर के समीप नांगल नामक स्थान से पकड़ कर दिल्ली ले जाया गया ,जहां बंदा बहादुर को मृत्युदंड दिया गया बंदा की मृत्यु के साथ ही सिक्ख नेतृत्व विहीन हो गए तथा अनेक छोटे छोटे दलों में विभक्त हो गए। यही छोटे – छोटे दल / राज्य मिसल कहलाये।

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