राजस्थान के क्रांतिकारी

राजस्थान के क्रांतिकारी


Revolutionaries of Rajasthan


अमरचंद बाठिया-

  • अमरचंद बाठिया का जन्म 1793 ई. में बीकानेर में हुआ था।
  • कुछ समय पश्चात अमरचंद ग्वालियर जा रहने लगे थे। वहाँ लोग इन्हें ग्वालियर सेठ कहने लगे थे।
  • 1857 की क्रांति के समय अमरचंद ने लक्ष्मीबाई की आर्थिक सहायता की थी। (आर्थिक सहायता करने वाले को भामाशाह कहा जाता है।)
  • अंग्रेजों ने इनको गिरफ़्तार कर लिया था। अमरचंद पर दो आरोप लगाये गये थे। एक इन्होने लक्ष्मीबाई की सहायता की व दूसरा इन्होने क्रांतिकारियों की सहायता की थी।
  • अमरचंद के 8 साल के बेटे को तोप से मुह के आगे बैठा के इन्ही के सामने उड़ा दिया गया था।
  • अमरचंद को ग्वालियर पेड़ में फांसी दी गयी थी। (कहा जाता है की अमरचंद को फ़ासी  देते हुए प्रथम बार रस्सी टूट गयी थी, दूसरी बार पेड़ की शाखा टूट गयी थी। फिर उन्हें खी और मार कर इस पेड़ में लटका दिया गया था। तीन दिन तक शव इसी पेड़ में लटका रहा था।)
  • राजस्थान की क्रांति के प्रथम शहीद व्यक्ति अमरचंद बाठिया थे।
  • अमरचंद को राजस्थान का मंगल पाण्डेय कहा जाता है।
  • अमरचंद को 22 जून 1858 ई. को फांसी दी गयी थी।
  • अमरचंद को भामाशाह द्वित्तीय 1857 की क्रांति के भामाशाह भी कहा जाता है।

अर्जुन लाल सेठी – 

  • अर्जुन लाल का जन्म 1880ई. में जयपुर के जैन परिवार में हुआ था।
  • अर्जुन लाल सेठी ने इलाहबाद (वर्तमान प्रयागराज) से बी.ए. किया था।
  • बी.ए. करने के पश्चात अर्जुन लाल को चौमू के जिलाधीश बनने का प्रस्ताव आया था। अर्जुन लाल ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा सेठी अगर नौकरी करेगा तो अंग्रेजों को बाहर कौन निकलेगा।
  • अर्जुन लाल सेठ को जयपुर में जनजागृति का जनक कहा जाता है।
  • अर्जुन लाल को राजस्थान का दधीजी , लोकमान्य कहा जाता है।

अर्जुन लाल सेठी के तीन मुख्य कार्य – 

1. जैन शिक्षा प्रचारक समिति –

  • जैन शिक्षा प्रचारक समिति 1905 में जयपुर में खुली थी।
  • इस समिति को 1907 में जैन शिक्षा सोसाइटी नाम से अजमेर ले जाया गया था।
  • 1908 में पुनः इस समिति को वापिस जयपुर जैनवर्धन पाठशाला नाम से लाया गया था।
  • इस सिमिति का मुख्य कार्य क्रांतिकारियों को तैयार करना था।
  • इस समिति के मुखिया विष्णुदत्त थे।

2. हार्डिंग बम कांड –

  • यह बम कांड  23 दिसम्बर 1912 में हुआ था।
  • लॉर्ड हार्डिंग पर चाँदनी चौक में एक जुलूस के दौरान एक बम फेंका गया था।
  • यह बम जोरावरसिंह ने फेका था। इस समय जोरावरसिंह सिंह के सात इनके भतीजे प्रताप सिंह भी थे।
  • जोरावरसिंह तो यहाँ से निकलने में सफल रहे परन्तु मोतीचंद व विष्णुदत्त को गिरफ्तार कर लिया  गया था।
  • मोतीचंद को फांसीविष्णुदत्त को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गयी थी।
  • इस कांड में अर्जुन लाल सेठ का कोई भी सबूत नहीं मिला था।

3. आरा हत्याकांड –

  • आरा मुगलसराय (बिहार) में है।
  • आन्दोलनकारियों को रुपये की जरूरत थी, जिसकी वजह से इन्होने एक संत को लुटने का फैलसा किया था। इस लूटपाट में संत की मृत्यु हो गयी थी।
  • जिसके बाद बिना किसी सबूत के अर्जुन लाल सेठी को गिरफ़्तार कर लिया गया था।
  • जयपुर के महाराजा के आदेश पर अर्जुन लाल सेठी को वेल्लूर (तमिलनाडु) भेज दिया गया था।
  • यहाँ अर्जुन लाल सेठी ने प्रशासन के खराब व्यवहार की वजह से 70 दिनों की भूख हड़ताल भी की थी।
  • इसके पश्चात यहाँ से सभी कैदियों को रिहा कर दिया गया था।
  • इसके बाद अर्जुन लाल सेठी जी ने अजमेर आकर अपना नाम करीम खां रख लिया था।
  • अर्जुन लाल सेठी ने अपनी आजीविका चलाने के लिए अजमेर दरगाह में मुस्लिम बच्चों को अरबी व फ़ारसी पढ़ाते थे।
  • काकोरी कांड से भागे अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ को अर्जुन लाल सेठी ने शरण दी थी।
  • अर्जुन लाल सेठी ने शुद्रमुक्ति, मदनपराजय आदि पुस्तके लिख थी।
  • अजमेर में ही अर्जुन लाल सेठी की मृत्यु हुई थी व इन्हें यही दफना दिया गया था।
  • इनकी मृत्यु पर सुन्दरलाल बहुगुणा ने कहा था “सेठी जी भारत माँ के सच्चे सपूत थे। अपने दीपक की लो से पुरे हिन्दुस्तान को जगाया आज स्वंय बुझ गये। “

हीरालाल शास्त्री – 

  • हीरालाल शास्त्री का जन्म 1899 में जयपुर में हुआ था।
  • जयपुर प्रजामंडल ने जेंटलमैन अग्रीमेंट 1942 के तहत भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया था।
  • हीरालाल ने एक गीत लिखा था प्रलय: प्रतिज्ञा नमो: नम:
  • इनकी आत्मकथा प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र है।
  • हीरालाल निवाई (टोंक) चले गये थे। वहाँ इन्होने शांता बाई कुटीर की स्थापना की थी।
  • इसी शांता बाई कुटीर को बाद में वनस्थली विद्यापीठ कहा जाने लगा।
  • एकीकरण के समय चौथे चरण के प्रधानमंत्री बने थे।
  • यह राजस्थान के एकमात्र मुखमंत्री बने जिन्हें शपथ राजप्रमुख ने दिलवाई थी।

जमनालाल बजाज –

  • जमनालाल बजाज का जन्म  4 नवम्बर 1889, काशी का बास गाँव (सीकर, राजस्थान) में हुआ था।
  • जमनालाल बजाज के पिता का नाम कनीराम व माता का नाम बिरधीबाई था।
  • जमनालाल बजाज की पत्नी का नाम जानकी देवी था।
  • इनको गुलाम नम्बर 4, गांधी जी के 5वें पुत्र आदि उपनामों से जाना जाता है।
  • 1914-1918 तक हुए प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों का सहयोग करने के कारण जमनालाल बजाज को रायबहादूर की उपाधि ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई थी।
  • जमनालाल बजाज ने असहयोग आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गयी उपाधि को वापस लौटा दिया था।
  • जमनालाल बजाज हिंदी को ईमान की भाषा कहा करते थे।
  • सन् 1938 में जयपुर प्रजामण्डल का पूनर्गठन जमनालाल बजाज के द्वारा ही किया गया था।
  •  जमनालाल बजाज द्वारा सीकर प्रजामण्डल की स्थापना की गई थी।
  • जमनालाल बजाज द्वारा वर्धा (गुजरात) में सन् 1921 में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना गई थी।
  • जमनालाल बजाज की मृत्यु 11 फरवरी 1942 को हुई थी।
  • 4 नवम्बर 1970 को जमनालाल बजाज की मृत्यु के पश्चात भारत सरकार के द्वारा जमनालाल बजाज की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया था।
  • सन् 1956 में जानकी देवी (जमनालाल बजाज की पत्नी) “पद्म विभूषण” प्राप्त करने वाली राजस्थान की प्रथम महिला थी।

चरखा संघ-

  • जमनालाल बजाज द्वारा सन् 1925 में राजस्थान के अजमेर में चरखा संघ की स्थापना की गई थी।
  • सन् 1927 में इस संघ को अजमेर से जयपुर स्थानांतरित कर दिया गया था।

जानकी देवी बजाज –

  • जानकी देवी का जन्म 7 जनवरी 1893, जरौरा (मध्यप्रदेश) में हुआ था।
  • सन् 1956 में जानकी देवी को “पद्म विभूषण” पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • जानकी देवी की आत्म कथा का नाम मेरी जीवन यात्रा है।
  • जानकी देवी का विवाह जमनालाल बजाज के साथ सन् 1902 में किया गया था।
  • सन् 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान जानकी देवी जेल गई थी।
  • सन् 1933 में जानकी देवी को कलकत्ता अखिल भारतीय मारवाडी सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया था।
  • जानकी देवी की मृत्यु 21 मई 1979 को हुयी थी।

श्रीमती इंदुमती गोयनका-

  • श्रीमती इंदुमती गोयनका द्वारा सन् 1930 में राष्ट्रीय महिला समिति की स्थापना की गई थी।
  • श्रीमती इंदुमती गोयनका राजस्थान की प्रथम महिला थी, जो राजस्थान मूल की कलकता प्रवासी 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में बंगाल से गिरफ्तार हुई थी।

दामोदर लाल व्यास-

  • दामोदर लाल व्यास का जन्म 9 नवम्बर 1909 को मालपुर कस्बा, टोंक (राजस्थान) में हुआ था।
  • दामोदर लाल व्यास के पिता का नाम बृजलाल व्यास व माता का नाम कस्तूरबा व्यास था।
  • इनका उपनाम राजस्थान का लौह पुरुष है।
  • इनकी मृत्यु 14 जनवरी 1976 को हुई थी।

जयनारायण व्यास-

  • जयनारायण व्यास का जन्म 18 फरवरी 1899 जोधपुर, राजस्थान में हुआ था।
  • जयनारायण व्यास को लक्कड का फक्कड , धनु का धनी , लोकनायक , शेर-ए-राजस्थान , मास्साब आदि उपनामों से जाना जाता है।
  • जयनारायण व्यास ने पोपा बाई की पोल, मारवाड़ की अवस्था, मारवाड़ में उत्तर दायी शासन क्यों आदि पुस्तके लिखी थी।
  • यह राजस्थान का प्रथम व्यक्ति थे जिन्होने सामंत शाही का विरोध किया था।
  • यह राजस्थान के एकमात्र मनोनित एवं निर्वाचित मुख्यमंत्री बने थे।
  • इन्होने 1924-1925 में मारवाड़ हितकारिणी सभा का गठन किया तथा मारवाड़ में जनजागण का कार्य किया।
  • जयनारायण व्यास की मृत्यु 14 मार्च 1963 को हुई थी।

जयनारायण व्यास द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रिकाएं-

1. आगी-बाण-

  • आगी-बाण पत्रिका राजस्थानी भाषा में प्रकाशित होने वाली प्रथम राजनैतिक पत्रिका थी।
  • इस पत्रिका का प्रकाशन ब्यावर (अजमेर, राजस्थान) में होता था।

2. पीप-

  • पीप पत्रिका अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की जाती थी।

3. अखण्ड भारत-

  • अखण्ड भारत पत्रिका की शुरूआत 1936 में मुम्बई से की गई थी।

4. तरुण राजस्थान-

  • तरुण राजस्थान पत्रिका की शुरूआत 1927 में ब्यावर (अजमेर, राजस्थान) से की गई थी।

तेज कवि –

  • तेज कवि का जन्म  21 जून 1881 (जैसलमेर, राजस्थान) में हुआ था।
  • तेज कवि ने स्वतंत्रता बावनो (स्वतंत्र बावनी) नामक एक गीत  लिखा था।
  • तेज कवि का कथन –  कमीश्नर खोल दरवाजा हमें भी जैल जाना है हिन्द तेरा है न तेरे बाप का है यह कैसा लगाया बन्दी खाना है।
  • तेज कवि की मृत्यु 1926 में हुई थी।

बाल मुकुंद बिस्सा –

  • बाल मुकुंद बिस्सा का जन्म 1908 पीलवा या मीलवा गाँव, डीडवाना तहसील (नागौर, राजस्थान) में हुआ था।
  • बाल मुकुंद बिस्सा को राजस्थान का जतिन दास उपनाम से भी जाना जाता है।
  • सन् 1924 में इनके द्वारा राजस्थान के जोधपुर में चर्खा एजेंसी तथा खादी भण्डार की स्थापना की गई थी।
  • बाल मुकुंद बिस्सा की मृत्यु बीडन हाॅस्पिटल (जोधपुर, राजस्थान) में 19 जून 1942 को भूख हड़ताल के कारण हुई थी।

सागरमल गोपा –

  • सागरमल गोपा का जन्म 3 नवम्बर 1900 जैसलमेर, राजस्थान में हुआ था।
  • सन् 1915 में इनके द्वारा सर्वहितकारिणी वाचनालय की स्थापना की गई थी।
  • इनका जैसलमेर तथा हैदराबाद रियासत में जाना प्रतिबंध था।
  • 4 अप्रैल 1946 को सागरमल गोपा के उप्पर मिट्टी का तेल डालकर इन्हें जिन्दा जला दिया गया था।
  • इस समय जैसलमेर का शासक जवाहर सिंह तथा जैलर गुमान सिंह था।
  • सागरमल गोपा हत्याकाण्ड की जाँच गोपाल स्वरूप पाठक आयोग के द्वारा की गई थी।
  • सागरमल गोपा की हत्या के पश्चात जनता ने आक्रोश में आकर “खून के बदले खून” नामक नारा दिया था।

दामोदर दास राठी –

  • दामोदर दास राठी का जन्म 1861 पोकरण (जैसलमेर, राजस्थान) में हुआ था।
  • दामोदर दास राठी को सहस्त्र क्रांति का भामाशाह उपनाम से भी जाना जाता है।
  • दामोदर दास राठी द्वारा सन् 1916 में  ब्यावर (अजमेर, राजस्थान) में होमरूल लीग की स्थापना की थी।
  • इनके द्वारा ब्यावर (अजमेर, राजस्थान) में सनातन धर्मनव भारत विद्यालय की स्थापना की थी।
  • सन् 1915 की सहस्त्र क्रांति में दामोदर दास राठी ने गोपाल सिंह खरवा की सहायता की थी।
  • इसी कारण से दामोदर दास राठी को सहस्त्र क्रांति का भामाशाह कहा जाता है।
  • दामोदर दास राठी द्वारा सन् 1889 मे राजस्थान की प्रथम सूती वस्त्र मील “द कृष्णा काॅटन मील” की स्थापना ब्यावर (अजमेर, राजस्थान) में की गई थी।
  • इनकी कर्मभूमि ब्यावर (अजमेर, राजस्थान) रही थी।
  • दामोदर दास राठी की मृत्यु 2 जनवरी 1918 में हुई थी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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