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राजस्थान के किसान आन्दोलन (भाग – II)

राजस्थान के किसान आन्दोलन (भाग – II)


Farmers Movement of Rajasthan (Part – II)


अलवर किसान आन्दोलन (1924) – 

  • यहाँ के शासक जयसिंह ने जंगली सुअरों को मारने में पाबंधी लगे थी।
  • किसान जंगली सुअरों से काफ़ी परेशान हो गये थे क्यूंकि जंगली सुअर फसल खराब कर रहे थे।
  • इसी कारण से अलवर के किसानों ने जंगली सुअरों को मारने को लेकर एक आन्दोलन चलाया था।
  • इस आन्दोलन के कारण अन्त में किसानों को जंगली सुअरों को मारने की अनुमति मिल गयी थी।

मेव किसान आन्दोलन ( 1932 से 1933 तक मेवात-अलवर, भरतपुर में) – 

  • मेव किसान आन्दोलन का नेतृत्व मोहम्मद अली यासीन खां ने किया था।
  • यह राजस्थान राज्य का एकमात्र किसान आन्दोलन था, जिसमें साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी।
  • शासक जयसिंह के सामने अंजुमन खादीम उल इस्लामिक संस्था की मांग रखी गयी थी।
  • 1933 में अलवर के महाराजा जयसिंह ने किसानों की सभी मांगों को मान लिया था।

नीमूचाणा किसान आन्दोलन (14 मई 1925 अलवर) –

  • यह राजस्थान का एकमात्र किसान आन्दोलन था जो राजपूतों ने किया था।
  • 14 मई 1925 को गोविन्दसिंह व माधवसिंह के नेतृत्व में सभी किसान नीमूचाणा ग्राम में एकत्रित हुए थे।
  • राजा जयसिंह ने नीमूचाणा ग्राम में पुलिस को गोली चलाने का आदेश दिया था, इस गोली बारी में सैंकडों किसान मारे गये थे। जिसमे गोपाल दास भी मारे गये थे।
  • इस आन्दोलन में गोली छाज्जू सिंह ने चलाई थी।
  • महात्मा गांधी ने इस हत्याकाण्ड को द्वितीय डायरशाही बताया था।
  • रियासती अखबार में लिखा था यह हत्याकाण्ड तो जलियावाला बाग हत्याकाण्ड से भी था।
  • रामनारायण चौधरी ने इस हत्याकाण्ड को नीमूचाणा हत्याकाण्ड नाम दिया था।

बीकानेर किसान आन्दोलन – 

  • बीकानेर किसान आन्दोलन के समय यहाँ के राजा गंगासिंह थे।
  • गंगासिंह गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंग्लैंड गये हुए थे। इनकी अनुपस्थिति में बीकानेर के अखबार बीकानेर दिग्दर्शन में गंगासिंह के विरुद्ध खबरे छपा दी थी।
  • भारत वापिस आने के पश्चात गंगासिंह ने कुछ लोगों को गलत खबर छपाने के आरोप में गिरफ़्तार किया था, तथा इस घटना को बीकानेर षड्यंत्र केस बताया था।
  • बीकानेर किसान आंदोलन का नेतृत्व चौधरी कुम्भाराम ने किया था।

बीकानेर के अंदर चार और आन्दोलन हुए थे।

दूधवाखारा किसान आंदोलन  – 

  • दूधवाखारा बीकानेर रियासत में आता था। (वर्तमान में चुरू में पड़ता है।)
  • दूधवाखारा आन्दोलन का नेतृत्व मघाराम ने किया था।

कांगड काण्ड  – 

  • कांगड़ काण्ड रतनगढ़ (चुरू) में हुआ था।

रायसीनगर – 

  • रायसीनगर में  हुए आन्दोलन में झंडा लेके जा रहे बीरबल के गोली मार दी गयी थी।
  • शहीद बीरबल का संबंध रायसीनगर आन्दोलन से है।

उदासर – 

  • बीकानेर किसान आन्दोलन की शुरुवात उदासर से हुई थी।

मारवाड़ किसान आन्दोलन (जोधपुर) – 

  • मारवाड़ किसान आन्दोलन का नेतृत्व जयनारायण व्यास द्वारा किया गया था।
  • इस आन्दोलन में जयनारायण व्यास के सहयोगी राधाकृष्ण तात थे।
  • 1923 में जयनारायण व्यास जोधपुर मे ने मारवाड़ हितकारिणी सभा का गठन किया था। इसी सभा के माध्यम से यह आन्दोलन चलता रहा था। इस आन्दोलम में  किसानों को लागतों व बेगारों के विरुद्ध जागरूक करने का प्रयास शुरू किया गया था।
  • इस सभा को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया था।
  • 1922-24 के मध्य मादा पशुओं के निष्काशन के लिए आंदोलन हुआ था।

तौल आन्दोलन (1920-21) –

  • 1920-21 ई० में तौल आंदोलन की शुरुआत जोधपुर में चांदमल सुराणा ने की थी।
  • मारवाड़ में 100 तोले का एक सेर होता था परन्तु मारवाड़ सरकार ने ब्रिटिश भारत की तरह 8० तोले का एक सेर कर दिया, जिससे क्रोधित होकर जनता ने आन्दोलन कर दिया था।
  • चांदमल सुराणा ने मारवाड़ सेवा संघ के माध्यम से मारवाड़ सरकार के विरुद्ध हडताल शुरू कर दिया था।
  • सरकार को इस हड़ताल के आगे झुकना पड़ा व नया तौल जारी करने का निर्णय रद्द कर दिया।

डाबडा हत्याकाण्ड – 

  • डाबडा हत्याकांड 13 मार्च 1947 को डीडवाना के पास डाबडा गाँव (नागौर) में हुआ था।
  • मथुरादास माथुर डाबड़ा में सम्मेलन आयोजित किया था।
  • इस आंदोलन में ठिकाने के अनुचरों और जागीरदारों ने हमला कर दिया था।
  • इस हत्याकाण्ड में चुन्नीलाल शर्मा, रूघाराम चौधरी, रामनारायण चौधरी ( लाडनूं ) , पन्नाराम चौधरी, जग्गू जाट तथा जागीरदारों में मेहताब सिंह मारे गये थे।

चंदावल घटना (सोजत पाली) – 

  • 28 मार्च, 1942 को मांगीलाल (लोक परिषद् के सदस्य) ने उत्तरदायी सरकार दिवस मनाने के लिए आस-पास से सदस्यों को चंदावल में आमंत्रित किया था।
  • चंदावल के ठाकुर ने इस कार्यक्रम का आयोजन को नहीं होने दिया व सोजत (पाली) से आने वाले व्यक्तियों पर लाठीचार्ज करवाया था।
  • इस लाठीचार्ज में मिट्ठा लाल, मारकण्डेश्वर, विजयशंकर, रामसुख, चांदमल, हरिराम आदि को गम्भीर चोटें आयी थी व इन्हें इलाज के लिए जोधपुर के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जैसलमेर किसान आंदोलन – 

  • शासक शालिवाहन द्वितीय के समय लानी कर लगाया जाता था।
  • लानी कर के विरूद्ध में आन्दोलन हुआ था।
  • माहेश्वरी युवा मंडल की स्थापना जैसलमेर में रघुनाथ मेहता की अध्यक्षकता में हुयी थी।

सीकर किसान आन्दोलन – 

  • सीकर किसान आन्दोलन के समय शासक मान सिंह द्वितीय था।
  • सीकर का सामंत कल्याण सिंह था।
  • कल्याण सिंह ने लगान 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया था।

चिड़ावा सेवा समिति –

  • 1921 में राम नारायण चौधरी ने चिड़ावा सेवा समिति बनाकर जन जागर्ति का कार्य किया था।
  • तरुण राजस्थान पत्रिका में खबरे छपवायी थी।

शेखावाटी किसान आन्दोलन – (1931 – 47) – 

  • शेखावाटी जयपुर रियासत का  ठिकाना था।
  • 1931 में राजस्थान जाट क्षेत्रिय महासभा का गठन हुआ था।
  • राजस्थान जाट क्षेत्रिय महासभा ने शेखावटी किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया था।
  • शेखावटी किसानों की मांगे सरकार द्वारा नहीं मानी गयी थी।

झुन्झुनू किसान आन्दोलन – 

  • झुन्झुनू किसान आन्दोलन का नेतृत्व सरदार हरलाल सिंह ने किया था।
  • शेखावटी किसान आन्दोलन के विस्तार के पश्चात यह झुन्झुनू किसान आन्दोलन हुआ था।
  • 1934 में कटराथल सभा (सीकर) सम्मेलन का नेतृत्व किशोरी देवी द्वारा किया गया था।
  • इस सम्मेलन में लगभग दस हजार महिलाओं ने भाग लिया था।

जयसिंहपूरा घटना – 

  • 1934 ई. में ठाकुर ईश्वरी सिंह द्वारा जयपुर के जयसिंहपूरा गाँव के किसानों पर गोलियाँ चलवायी थी।
  • जयसिंहपूरा हत्याकाण्ड के पश्चात ईश्वरीसिंह व उसके साथियों को सज़ा हुयी थी।

खूडी गांव घटना – 

  • 1935 में खूडी गांव की घटना हुई थी।
  • इस घटना में चौधरी रत्ना को मार दिया गया था।

कुदन हत्याकांड – 

  • इस हत्याकांड में वेब ने गोलिया चलायी थी।
  • इस हत्याकांड का मामला इग्लैंड की संसद हाउस ऑफ़ कॉमन में मिस्टर लोरांस ने उठाया था।
  • कुदन हत्याकांड की खबरे इग्लैंड के डेली हीरालार्ड अखबार में छपी थी।
  • मंडावा के देवीबख्श ने नागरिक अधिकारों की घोषणा की थी।
  • यहाँ विजयसिंह पथिक भी आये थे, जिन्होंने बकाला की धाणी से लोगो को संबोधित किया था।

 

 

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